E20 Petrol: माइलेज, इंजन डैमेज और कीमत पर सरकार ने क्या कहा?
E20 Petrol Fact Check: देशभर में E20 पेट्रोल लागू होने के बाद सोशल मीडिया पर इससे जुड़े कई तरह के दावे वायरल हो रहे हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि इससे गाड़ी की माइलेज 30% तक कम हो जाती है, जबकि कुछ का दावा है कि यह पुराने इंजन को नुकसान पहुंचाता है या फिर वाहन की वारंटी और इंश्योरेंस भी खत्म हो सकता है।
इन सभी सवालों और अफवाहों पर अब पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति साफ कर दी है।
भारत ने तय समय से पहले हासिल किया E20 ब्लेंडिंग का लक्ष्य
सरकार के मुताबिक, भारत ने वर्ष 2025-26 में पेट्रोल में 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) का लक्ष्य तय समय से पांच साल पहले ही पूरा कर लिया है। साल 2013-14 में जहां पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा 1.5% से भी कम थी, वहीं अब यह बढ़कर 20% तक पहुंच चुकी है।
क्या E20 पेट्रोल से 30% माइलेज कम हो जाता है?
सरकार ने इस दावे को पूरी तरह गलत बताया है।
मंत्रालय के अनुसार, 30% का आंकड़ा केवल इथेनॉल की Calorific Value से जुड़ा है, इसका मतलब यह नहीं है कि गाड़ी की वास्तविक माइलेज 30% कम हो जाएगी।
असल माइलेज कई दूसरी चीजों पर निर्भर करती है, जैसे ड्राइविंग का तरीका, टायर का एयर प्रेशर, समय पर सर्विस, ट्रैफिक और एयर कंडीशनर का इस्तेमाल।
मारुति सुजुकी के आंकड़ों के अनुसार, यदि कोई कार 20 किमी प्रति लीटर की माइलेज देती है, तो E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर माइलेज में लगभग 0.6 किमी प्रति लीटर की ही कमी आ सकती है।

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क्या E20 पुराने इंजन को नुकसान पहुंचाता है?
सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल से पुराने वाहनों के इंजन खराब होने का कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया है।
E20 लागू करने से पहले वाहन कंपनियों, रिसर्च एजेंसियों और तेल कंपनियों ने इसकी व्यापक जांच और परीक्षण किए थे। इसके बाद ही इसे मंजूरी दी गई।
सरकार के अनुसार, लाखों पुराने वाहनों के सर्विस रिकॉर्ड की जांच में भी E20 की वजह से इंजन खराब होने का कोई सबूत नहीं मिला।
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क्या E20 से गाड़ी की परफॉर्मेंस खराब होती है?
सरकार ने इस दावे को भी गलत बताया है।
सरकार के अनुसार, इथेनॉल एक हाई ऑक्टेन फ्यूल है। जब इसे पेट्रोल के साथ मिलाया जाता है तो E20 पेट्रोल की ऑक्टेन रेटिंग बढ़ जाती है।
E20 के लिए तैयार किए गए वाहनों में इससे बेहतर दहन (Combustion), स्मूद ड्राइविंग, बेहतर एक्सीलरेशन और कम प्रदूषण जैसे फायदे मिल सकते हैं।
क्या E20 इस्तेमाल करने से इंश्योरेंस या वारंटी खत्म हो जाएगी?
इस सवाल पर भी सरकार ने स्थिति साफ कर दी है।
मंत्रालय के मुताबिक, वाहन निर्माता कंपनियों और इंश्योरेंस कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि तय मानकों वाला E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से वाहन की वारंटी या इंश्योरेंस पर कोई असर नहीं पड़ता।
अगर इथेनॉल सस्ता है तो पेट्रोल की कीमत कम क्यों नहीं हुई?
सरकार के अनुसार, यह तुलना पुराने आंकड़ों के आधार पर की जा रही है।
वर्ष 2020-21 में इथेनॉल की कीमत पेट्रोल से कम थी, लेकिन अब इथेनॉल की खरीद लागत बढ़ चुकी है और कई मामलों में यह रिफाइंड पेट्रोल से भी महंगा हो गया है।
फिर भी सरकार इथेनॉल ब्लेंडिंग जारी रखे हुए है क्योंकि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होती है, पर्यावरण को फायदा मिलता है और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलती है।
क्या सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में E20 को ‘एक्सपेरिमेंट‘ कहा था?
सरकार ने इस दावे को भी गलत बताया है।
मंत्रालय के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में चल रहा मामला इथेनॉल खरीद से जुड़े अनुबंधों का था, न कि E20 पेट्रोल की गुणवत्ता या सुरक्षा का।
क्या पेट्रोल में सीधे गन्ने का रस मिलाया जाता है?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो में ऐसा दावा किया जा रहा है।
सरकार ने इसे भ्रामक बताया है।
मंत्रालय के अनुसार, फ्यूल में इस्तेमाल होने वाला इथेनॉल सीधे गन्ने का रस नहीं होता। इसे फर्मेंटेशन, डिस्टिलेशन और कई औद्योगिक प्रक्रियाओं से तैयार किया जाता है। इसके बाद गुणवत्ता जांच पूरी होने पर ही इसे पेट्रोल में मिलाया जाता है।
क्या 1 लीटर इथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी लगता है?
सरकार ने इस दावे को भी गलत बताया है।
सरकार के मुताबिक, आधुनिक इथेनॉल प्लांट में 1 लीटर इथेनॉल बनाने के लिए केवल 3 से 5 लीटर प्रोसेस्ड पानी का उपयोग होता है। साथ ही आधुनिक डिस्टिलरी में पानी को दोबारा इस्तेमाल करने की व्यवस्था भी होती है।
सरकार ने यह भी कहा कि खेती में इस्तेमाल होने वाले पूरे पानी को इथेनॉल उत्पादन से जोड़ना सही नहीं है, क्योंकि केवल सरकार द्वारा मंजूर अतिरिक्त कृषि उपज का ही उपयोग इथेनॉल बनाने में किया जाता है।
क्या E20 पेट्रोल से चींटियां और मधुमक्खियां आकर्षित होती हैं?
सरकार के अनुसार, यह दावा भी पूरी तरह गलत है।
फ्यूल ग्रेड इथेनॉल में किसी तरह की चीनी नहीं होती। इसके अलावा इसमें ऐसे पदार्थ मिलाए जाते हैं जो कीड़ों को दूर रखते हैं और पेट्रोल की गंध ही प्रमुख रहती है।
क्या E20 पेट्रोल पानी सोखकर फ्यूल टैंक खराब कर देता है ?
सरकार का कहना है कि किसी भी वाहन के फ्यूल टैंक में पानी नहीं जाना चाहिए, चाहे वह सामान्य पेट्रोल इस्तेमाल करे या E20।
आज के आधुनिक वाहनों में ऐसे सिस्टम दिए जाते हैं जो फ्यूल टैंक में पानी जाने से बचाते हैं और फ्यूल सिस्टम की सुरक्षा करते हैं।
Conclusion
सरकार के अनुसार, E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई दावे सही नहीं हैं। मंत्रालय का कहना है कि E20 से माइलेज में 30% की गिरावट नहीं आती, इससे इंजन को बड़े स्तर पर नुकसान नहीं होता और न ही वाहन की वारंटी या इंश्योरेंस पर कोई असर पड़ता है। सरकार का मानना है कि E20 कार्यक्रम का उद्देश्य देश की तेल आयात पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और किसानों की आय बढ़ाना है।